GENESIS
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42
43
44
45
46
47
48
49
50
Chapter 33
Gene | UrduGeoD | 33:1 | फिर एसौ उनकी तरफ़ आता हुआ नज़र आया। उसके साथ 400 आदमी थे। उन्हें देखकर याक़ूब ने बच्चों को बाँटकर लियाह, राख़िल और दोनों लौंडियों के हवाले कर दिया। | |
Gene | UrduGeoD | 33:2 | उसने दोनों लौंडियों को उनके बच्चों समेत आगे चलने दिया। फिर लियाह उसके बच्चों समेत और आख़िर में राख़िल और यूसुफ़ आए। | |
Gene | UrduGeoD | 33:5 | फिर एसौ ने औरतों और बच्चों को देखा। उसने पूछा, “तुम्हारे साथ यह लोग कौन हैं?” याक़ूब ने कहा, “यह आपके ख़ादिम के बच्चे हैं जो अल्लाह ने अपने करम से नवाज़े हैं।” | |
Gene | UrduGeoD | 33:8 | एसौ ने पूछा, “जिस जानवरों के बड़े ग़ोल से मेरी मुलाक़ात हुई उससे क्या मुराद है?” याक़ूब ने जवाब दिया, “यह तोह्फ़ा है ताकि आपका ख़ादिम आपकी नज़र में मक़बूल हो।” | |
Gene | UrduGeoD | 33:10 | याक़ूब ने कहा, “नहीं जी, अगर मुझ पर आपके करम की नज़र है तो मेरे इस तोह्फ़े को ज़रूर क़बूल फ़रमाएँ। क्योंकि जब मैंने आपका चेहरा देखा तो वह मेरे लिए अल्लाह के चेहरे की मानिंद था, आपने मेरे साथ इस क़दर अच्छा सुलूक किया है। | |
Gene | UrduGeoD | 33:11 | मेहरबानी करके यह तोह्फ़ा क़बूल करें जो मैं आपके लिए लाया हूँ। क्योंकि अल्लाह ने मुझ पर अपने करम का इज़हार किया है, और मेरे पास बहुत कुछ है।” याक़ूब इसरार करता रहा तो आख़िरकार एसौ ने उसे क़बूल कर लिया। फिर एसौ कहने लगा, | |
Gene | UrduGeoD | 33:13 | याक़ूब ने जवाब दिया, “मेरे मालिक, आप जानते हैं कि मेरे बच्चे नाज़ुक हैं। मेरे पास भेड़-बकरियाँ, गाय-बैल और उनके दूध पीनेवाले बच्चे भी हैं। अगर मैं उन्हें एक दिन के लिए भी हद से ज़्यादा हाँकूँ तो वह मर जाएंगे। | |
Gene | UrduGeoD | 33:14 | मेरे मालिक, मेहरबानी करके मेरे आगे आगे जाएँ। मैं आराम से उसी रफ़्तार से आपके पीछे पीछे चलता रहूँगा जिस रफ़्तार से मेरे मवेशी और मेरे बच्चे चल सकेंगे। यों हम आहिस्ता चलते हुए आपके पास सईर पहुँचेंगे।” | |
Gene | UrduGeoD | 33:15 | एसौ ने कहा, “क्या मैं अपने आदमियों में से कुछ आपके पास छोड़ दूँ?” लेकिन याक़ूब ने कहा, “क्या ज़रूरत है? सबसे अहम बात यह है कि आपने मुझे क़बूल कर लिया है।” | |
Gene | UrduGeoD | 33:17 | याक़ूब सुक्कात के लिए रवाना हुआ। वहाँ उसने अपने लिए मकान बना लिया और अपने मवेशियों के लिए झोंपड़ियाँ। इसलिए उस मक़ाम का नाम सुक्कात यानी झोंपड़ियाँ पड़ गया। | |
Gene | UrduGeoD | 33:18 | फिर याक़ूब चलते चलते सलामती से सिकम शहर पहुँचा। यों उसका मसोपुतामिया से मुल्के-कनान तक का सफ़र इख़्तिताम तक पहुँच गया। उसने अपने ख़ैमे शहर के सामने लगाए। | |
Gene | UrduGeoD | 33:19 | उसके ख़ैमे हमोर की औलाद की ज़मीन पर लगे थे। उसने यह ज़मीन चाँदी के 100 सिक्कों के बदले ख़रीद ली। | |